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विश्व जूनियर स्क्वॉश खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बनीं अनाहत सिंह

शीर्ष वरीयता प्राप्त अनाहत ने ओंटारियो में मिस्र की रुकैया सलेम को सीधे गेमों में हराया। पिछले साल वह इन्हीं चैंपियनशिप में कांस्य जीती थीं।

लेखक Rahul Iyerप्रकाशित 3 मिनट का पाठ
Anahat Singh holding the championship salver on court after the World Squash Junior Championships final. फाइल फोटो।
Anahat Singh holding the championship salver on court after the World Squash Junior Championships final. फाइल फोटो। · फोटो: World Squash

अनाहत सिंह ने शनिवार को ओंटारियो में विश्व स्क्वॉश जूनियर व्यक्तिगत चैंपियनशिप का महिला फाइनल जीता और इस खेल में विश्व जूनियर चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय बन गईं।

विश्व में 20वें नंबर की और शीर्ष वरीयता प्राप्त अनाहत ने मिस्र की रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से हराया। मिस्र की खिलाड़ी के खिलाफ सीधे गेमों में जीत स्क्वॉश में खास मायने रखती है, क्योंकि दो दशक से जूनियर और सीनियर दोनों स्तर पर दबदबा मिस्र का रहा है और फाइनल तक पहुंचने का मतलब आमतौर पर उनमें से एक से ज़्यादा को हराना होता है।

यह नतीजा अचानक नहीं, एक क्रम है। अनाहत पिछले साल सेमीफाइनल तक पहुंचकर इन्हीं चैंपियनशिप में कांस्य जीती थीं और इस बार शीर्ष वरीयता के साथ ओंटारियो पहुंचीं। जूनियर खिताब सीनियर करियर में असमान रूप से बदलते हैं, पर जो खिलाड़ी यह बदलाव कर पाते हैं वे अक्सर वही होते हैं जिन्होंने इस स्तर पर जीतते हुए भी सुधार जारी रखा।

भारतीय स्क्वॉश के लिए इसका महत्व निजी जितना ही संस्थागत है। पहला विश्व जूनियर खिताब महासंघ को वह ठोस नतीजा देता है जिसके सहारे सुविधाओं और धन की मांग की जा सके, और पतले घरेलू आधार वाले खेल में एक खिलाड़ी तथा खिलाड़ियों की कतार का फर्क यही है।

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