भारतीय सेना ने अमेरिका से जैवलिन टैंक रोधी गाइडेड मिसाइल प्रणाली खरीदने के लिए लेटर ऑफ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस पर हस्ताक्षर किए हैं, यह सरकार से सरकार के बीच होने वाला लेनदेन है जो अमेरिकी विदेशी सैन्य बिक्री प्रक्रिया के जरिए संपन्न हुआ, अमेरिकी पक्ष ने इसे दोनों देशों के बीच गहरे होते रक्षा संबंधों का एक और संकेत बताते हुए इसका स्वागत किया है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस घटनाक्रम की घोषणा की, उन्होंने इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए बड़ी खबर बताया और कहा कि यह एक अहम कदम है जो दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सह उत्पादन की संभावनाओं का रास्ता भी खोलता है। गोर ने इस सौदे को भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग के रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के व्यापक रुझान का हिस्सा बताया।
इस समझौते के तहत भारत के करीब 100 एफजीएम-148 जैवलिन मिसाइल राउंड और 25 जैवलिन लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट खरीदने की उम्मीद है, इससे भारतीय सेना को एक ऐसी युद्ध में परखी जा चुकी कंधे से दागी जाने वाली प्रणाली मिलेगी जिसका इस्तेमाल अमेरिकी और सहयोगी सेनाएं पहले से बड़े पैमाने पर करती आई हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने नवंबर में अनुमान लगाया था कि मिसाइलों और संबंधित उपकरणों के पूरे पैकेज की कीमत करीब 4.57 करोड़ डॉलर हो सकती है, हालांकि हस्ताक्षरित समझौते का अंतिम मूल्य सार्वजनिक नहीं किया गया।
जैवलिन का निर्माण जैवलिन ज्वाइंट वेंचर करता है, जो लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन के बीच साझेदारी है और दशकों से अमेरिकी सेना और मरीन कोर के लिए इस प्रणाली का विकास और उत्पादन करता आया है। इस ज्वाइंट वेंचर ने भारत की भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के साथ पहले ही एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं ताकि मिसाइल प्रणाली के घरेलू सह उत्पादन की संभावना तलाशी जा सके, यह ऐसा कदम है जो भविष्य में भारतीय रक्षा मंत्रालय की जरूरतों को पूरा कर सकता है।
भारतीय सेना के लिए जैवलिन प्रणाली का जुड़ना एक सटीक निर्देशित, फायर एंड फॉरगेट टैंक रोधी क्षमता लाता है जिसे युद्ध क्षेत्र में व्यापक रूप से परखा जा चुका है, वहीं व्यापक संबंधों के लिहाज से यह सौदा नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच बढ़ती रक्षा लेनदेन की सूची में एक और कड़ी जोड़ता है, जिसे दोनों पक्षों के अधिकारी इस बात के सबूत के तौर पर पेश करते रहे हैं कि साझेदारी अब एकबारगी खरीद से आगे बढ़कर साझा उत्पादन की दिशा में बढ़ रही है।

