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बैंक ऑफ इंडिया को अनिवासी जमा से 1.2 अरब डॉलर चाहिए, मकसद सस्ती जमा है

सरकारी बैंक ने रिज़र्व बैंक की विशेष खिड़की से अब तक 20 करोड़ डॉलर जुटाए हैं। थोक जमा की जगह लेने से जमा लागत में 50 से 60 आधार अंक की बचत हो सकती है।

लेखक Ananya Raoप्रकाशित 4 मिनट का पाठ
Bank of India executives at the bank's Q1 FY 2026-27 results press meet, in front of a branded backdrop. फाइल फोटो।
Bank of India executives at the bank's Q1 FY 2026-27 results press meet, in front of a branded backdrop. फाइल फोटो।

बैंक ऑफ इंडिया रिज़र्व बैंक की उस विशेष व्यवस्था के तहत 1.2 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा जुटाना चाहता है जो व्यवस्था में डॉलर लाने के लिए चलाई जा रही है, और इसके अलावा विदेशी उधारी से 2 अरब डॉलर और जुटाने की योजना है। प्रबंध निदेशक रजनीश कर्नाटक ने कहा कि बैंक अब तक एफसीएनआर खिड़की से 20 करोड़ डॉलर जुटा चुका है।

मकसद सुर्खी नहीं, पैसे की लागत है। अगर बैंक 1.2 अरब डॉलर का लक्ष्य पूरा करता है तो यह करीब 10,000 से 11,000 करोड़ रुपये बैठता है। कर्नाटक ने कहा कि इससे बैंक थोक जमा पर निर्भरता घटा सकेगा और जमा की लागत कम होगी। कितनी, यह पूछे जाने पर उन्होंने थोक जमा के मुकाबले 50 से 60 आधार अंक की बचत बताई। बैंक अनिवासी ग्राहकों को 9 प्रतिशत तक लीवरेज दे रहा है ताकि इस खिड़की से ज़्यादा से ज़्यादा जमा आए।

पूरी कवायद का पैमाना भी ध्यान देने लायक है। रिज़र्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 17 जुलाई तक भारतीय बैंकों ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए बनी अलग अलग योजनाओं से मिलकर करीब 21 अरब डॉलर जुटाए। यह मुद्रा पर दबाव का व्यवस्था स्तर का जवाब है, जो अकेले हस्तक्षेप के बजाय जमा के ज़रिये दिया जा रहा है।

नतीजे भी इसी के साथ आए। पहली तिमाही में शुद्ध लाभ 36 प्रतिशत बढ़कर 3,068 करोड़ रुपये और परिचालन लाभ 26 प्रतिशत बढ़कर 5,051 करोड़ रहा। शुद्ध ब्याज आय 12.6 प्रतिशत बढ़कर 6,833 करोड़ और गैर ब्याज आय 19 प्रतिशत बढ़कर 2,579 करोड़ रही। शुद्ध ब्याज मार्जिन 2.52 प्रतिशत रहा, जो साल भर पहले 2.55 प्रतिशत था। कर्ज़ 18.6 प्रतिशत बढ़कर 7.98 लाख करोड़ और जमा 14.9 प्रतिशत बढ़कर 9.58 लाख करोड़ हुई, जबकि सकल फंसा कर्ज़ 111 आधार अंक सुधरकर 1.81 प्रतिशत रहा।

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