केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही वह दौर खत्म हुआ जिसमें राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के कथित पेपर लीक का मामला परीक्षा के विवाद से बढ़कर मंत्री की जवाबदेही का सवाल बन गया।
इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया और प्रधान ने इसे एक्स पर साझा किया। उन्होंने इस फैसले को अपनी साख के बजाय देश के विद्यार्थियों से जुड़ा बताया, लिखा कि पिछले दस दिन के घटनाक्रम से वह दुखी हैं, और कहा कि युवाओं की ऊर्जा भ्रम में नहीं उलझनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनों की स्थिति का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और किसी विद्यार्थी को कानूनी पचड़े में नहीं पड़ना चाहिए।
दबाव कॉकरोच जनता पार्टी के अभियान से बढ़ा था, जिसने उनके हटने को अपनी प्रमुख मांगों में रखा। संगठन का कहना था कि केंद्र ने नीट की कथित गड़बड़ियों और राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में बैठने वाले विद्यार्थियों की व्यापक शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।
यह इस्तीफा इसलिए असामान्य है कि यह सरकार सड़क के दबाव में शायद ही कभी मंत्री बदलती है। रियायत प्रक्रियागत है, ठोस नहीं। विभाग बदल गया, पर जिस परीक्षा व्यवस्था से विवाद पैदा हुआ वह तब तक वैसी ही है जब तक संसद कुछ नहीं करती। आने वाला सत्र यही परीक्षा लेगा।

