झंडू कुमार ने शुक्रवार को ग्लासगो में पुरुष हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग में कांस्य जीता, जो इन राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का पहला पदक है। बिहार के 28 वर्षीय इस खिलाड़ी ने 181 किलो और 190 किलो की सफल लिफ्ट के बाद 130.9 अंक हासिल किए।

196 किलो की उनकी तीसरी कोशिश नाकाम रही, जो उन्हें बड़े पदक की दौड़ में ला सकती थी। बाद में उन्होंने इस पर भावुक हुए बिना अपनी रणनीति बताई, पहली लिफ्ट सुरक्षित उठाना ताकि आत्मविश्वास बना रहे, दूसरी से पदक तालिका में आना और तीसरी स्वर्ण के लिए रखना। उन्होंने कहा कि चूक तकनीकी थी, जल्दबाज़ी में सांस लेने में गलती हुई और लिफ्ट सही उठने के बावजूद बाहर निकलते समय बार रैक में फंस गया।

भारतीय खेल प्राधिकरण की ओर से आयोजित बातचीत में उन्होंने कहा कि खुशी संभाले नहीं संभल रही और पिछली रात से नींद नहीं आई है। पदक की घोषणा पर मैदान में जो नाम गूंजा, वह उनके माता पिता ने पोलियो का इलाज कराने में सब कुछ लगा देने के बाद रखा था।

ग्लासगो तक का रास्ता उस काम से होकर गया जिसका खेल से कोई नाता नहीं था। कुमार अपनी ट्रेनिंग के लिए ज़रूरी खुराक और सप्लीमेंट का खर्च उठाने के लिए ई रिक्शा चलाते थे। भारतीय पैरा खेलों में यह इतना आम है कि इसे रंगीन ब्योरे के बजाय सीधे तथ्य की तरह कहा जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि उनके अगले लक्ष्य पैरा एशियाई खेल और पैरालंपिक हैं।