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भारत अलग एआई कानून पर विचार कर रहा है, कठिन हिस्सा एजेंटिक स्वायत्तता है

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सिंथेटिक मीडिया के लिए सहमति नियम, एआई एजेंट की स्वायत्तता की सीमा और जोखिम वाले उपयोगों के लिए सैंडबॉक्स देख रहा है।

लेखक Priya Menonप्रकाशित 5 मिनट का पाठ
Union Electronics and IT Minister Ashwini Vaishnaw speaking in front of the AI Impact Summit 2026 India backdrop. फाइल फोटो।
Union Electronics and IT Minister Ashwini Vaishnaw speaking in front of the AI Impact Summit 2026 India backdrop. फाइल फोटो।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सिंथेटिक रूप से बनी सामग्री के लिए सहमति आधारित ढांचा, एजेंटिक एआई की स्वायत्तता पर सीमाएं और उच्च जोखिम वाले उपयोगों के लिए नियामकीय सैंडबॉक्स पर विचार कर रहा है, क्योंकि यह तय किया जा रहा है कि भारत को अलग कृत्रिम बुद्धिमत्ता कानून चाहिए या नहीं।

प्रक्रिया का अहम फैसला यह है कि ऐसा कोई भी कानून सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के तहत आने के बजाय अपने आप में खड़ा होगा। मंत्रालय के साइबर कानून प्रभाग से कहा गया है कि वह आईटी अधिनियम और उसके तहत बने नियमों की समीक्षा कर खामियां बताए। क्रम यही सही है, नया कानून तब तक ठीक से नहीं लिखा जा सकता जब तक यह पता न हो कि मौजूदा कानून कहां तक पहुंचता है।

सिंथेटिक सामग्री वाला हिस्सा तुलनात्मक रूप से आसान है। इसका अर्थ है वह डिजिटल सामग्री जो व्यक्ति के बजाय मशीन ने बनाई या बदली हो, और सहमति की शर्त सवाल को वहीं रखती है जहां वह होना चाहिए, यानी क्या जिस व्यक्ति को दिखाया गया है उसने इजाज़त दी थी।

असली कठिनाई एजेंटिक एआई में है। ये वे प्रणालियां हैं जो कोई बड़ा लक्ष्य लेकर खुद कई चरणों की योजना बनाती हैं, बाहरी औज़ार इस्तेमाल करती हैं और बहुत कम मानवीय निगरानी में रास्ता बदलती रहती हैं। सरकार को यह देखना है कि ऐसे एजेंट को कितनी स्वायत्तता मिले और क्या वे सामने आए आंकड़े रखकर दोबारा इस्तेमाल कर सकें। ये सवाल एक साथ हर क्षेत्र को छूते हैं, इसीलिए मंत्रालय से भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड से सैंडबॉक्स पर परामर्श की उम्मीद है।

दो बाहरी कानूनी विशेषज्ञों से अलग अलग मसौदा दायित्व ढांचे मांगे गए हैं। दायित्व ही असली गुत्थी है। जब कोई एजेंट किसी लक्ष्य पर काम करते हुए नुकसान पहुंचाए, तो कानून को बताना होगा कि जिम्मेदारी तैनात करने वाले की है, मॉडल बनाने वाले की, या उसकी जिसने लक्ष्य तय किया, और आज वह यह नहीं बताता।

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