कच्चे तेल में उछाल और कमज़ोर होते रुपये के चलते शुक्रवार को भारतीय बाज़ार गिरे और खरीदार दूर रहे। निफ्टी 102.15 अंक यानी 0.4 प्रतिशत गिरकर 23,767.45 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 331.6 अंक यानी 0.4 प्रतिशत गिरकर 76,059.77 पर रहा। दोनों दिन में 1.2 प्रतिशत तक टूटे थे और दोपहर बाद संभले।
कोटक सिक्योरिटीज़ में इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा कि धारणा पर वैश्विक और घरेलू दोनों दबाव हैं, जिनमें कच्चे तेल की तेज़ी और रुपये की लगातार गिरावट शामिल है। उन्होंने अमेरिकी दस वर्षीय ट्रेज़री यील्ड के 4.71 प्रतिशत तक पहुंचने का भी ज़िक्र किया, जो कई महीनों का उच्चतम स्तर है।
तात्कालिक वजह तेल है। ब्रेंट सितंबर वायदा शुक्रवार को करीब 97.5 डॉलर प्रति बैरल था, जो मई के बाद पहली बार 100 डॉलर के ऊपर गया था। इससे पहले यमन के हूती आंदोलन ने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमले का दावा किया और अमेरिका ने ईरान पर और हमले किए। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज़ में तकनीकी शोध प्रमुख धर्मेश शाह ने कहा कि तेल के करीब 101 डॉलर से घटकर 97 पर आने से दिन की गिरावट कम हुई।
हफ्ते भर में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों 2.3 प्रतिशत गिरे, जो क्रमशः मई की शुरुआत और मार्च के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। निफ्टी का उतार चढ़ाव सूचकांक 4.1 प्रतिशत बढ़कर 14.03 पर पहुंचा। 23,800 के नीचे बंद होना मुख्य रूप से उन कारोबारियों के लिए मायने रखता है जो इसे संदर्भ मानते हैं, पर असली दबाव, यानी ब्रेंट के साथ बढ़ता तेल आयात बिल और उसके सामने कमज़ोर पड़ती मुद्रा, चार्ट का मामला नहीं है।

