एनटीपीसी के बोर्ड ने शुक्रवार 24 जुलाई की बैठक में गैर परिवर्तनीय डिबेंचर के ज़रिये 12,000 करोड़ रुपये तक जुटाने को मंज़ूरी दी। सरकारी बिजली कंपनी ने उसी शाम नियामकीय सूचना में यह जानकारी दी। ये डिबेंचर घरेलू बाज़ार में निजी नियोजन से एक या अधिक किस्तों में जारी होंगे।

यह अनुमति विशेष प्रस्ताव पारित होने की तारीख से एक साल तक या वित्त वर्ष 2027-28 की अगली वार्षिक आम बैठक तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगी। आकार, अवधि, ब्याज दर और कागज़ बीएसई, एनएसई या दोनों पर सूचीबद्ध होगा, यह जारी करते समय तय होगा।

यही ढांचा असली बात है, कोई ब्योरा नहीं। यह उधार लेने की मंज़ूरी है, उधार नहीं। किस्तों वाली सुविधा से कंपनी तब बाज़ार में जा सकती है जब दरें अनुकूल हों और तब दूर रह सकती है जब न हों, बजाय इसके कि महीनों पहले कोई एक तारीख तय कर ले। निजी नियोजन इसे संस्थागत खरीदारों तक सीमित रखता है और सार्वजनिक निर्गम से जल्दी निपटता है।

बिजली उत्पादक के लिए यह लचीलापन मायने रखता है, क्योंकि पूंजीगत खर्च कैलेंडर से नहीं, निर्माण कार्यक्रम से चलता है। सूचना में यह नहीं बताया गया कि पैसा किस काम आएगा, और काम का अगला सवाल यही है कि इसमें कितना मौजूदा कर्ज़ चुकाने में जाएगा और कितना नई क्षमता खरीदने में।