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3.8 अरब डॉलर का सौदा साइकेडेलिक दवाओं को मुख्यधारा मनोचिकित्सा में वापस लाता है

एली लिली अटाईबेकली को खरीद रही है। विज्ञान आशाजनक है और परीक्षण डिज़ाइन की दिक्कतें असली हैं, भारतीय दवा उद्योग को दोनों हिस्से पढ़ने चाहिए।

लेखक Priya Menonप्रकाशित 4 मिनट का पाठ
Pfizer Inc Middleton Research Pharmaceutical laboratory panoramio. File photograph. फाइल फोटो।
Pfizer Inc Middleton Research Pharmaceutical laboratory panoramio. File photograph. फाइल फोटो। · फोटो: Corey Coyle / BY 3.0 via Openverse

इस महीने एली लिली की यह घोषणा कि वह साइकेडेलिक मनोचिकित्सा पर काम कर रही क्लिनिकल चरण की बायोटेक कंपनी अटाईबेकली को 3.8 अरब डॉलर में खरीदेगी, इन यौगिकों की वापसी को दर्शाती है, और यह वापसी सिर्फ सांस्कृतिक चर्चा में नहीं बल्कि मानसिक रोगों के इलाज में है।

दिलचस्प बात इनके काम करने के तरीके में है। प्रचलित अवसादरोधी दवाएं हफ्तों में धीरे धीरे मस्तिष्क की रसायन प्रक्रिया बदलती हैं। अटाईबेकली ने जिन यौगिकों को उन्नत परीक्षणों तक पहुंचाया है उनका लक्ष्य कुछ ही खुराकों में तंत्रिका संबंधों को नए सिरे से जोड़ना है। यह इलाज का अलग स्वरूप है और यह उन मरीज़ों के लिए है जिन पर मौजूदा इलाज असर नहीं करता। अमेरिकी नियामक ने सामान्यीकृत चिंता विकार के लिए एलएसडी, अभिघातजन्य तनाव विकार के लिए एमडीएमए और उपचार प्रतिरोधी अवसाद के लिए साइलोसाइबिन को ब्रेकथ्रू दर्जा दिया है।

कठिनाइयां भी उतनी ही ढांचागत हैं। ये दवाएं नियंत्रित खुराक में मनोचिकित्सा के साथ दी जाती हैं, इसलिए परीक्षण में यौगिक के असर को चिकित्सा के असर से अलग करना कठिन है। दुष्प्रभावों और लत को लेकर सुरक्षा के सवाल अनसुलझे हैं। खुराक की रणनीति तय नहीं है, एक दिन की खुराक और दोबारा खुराक दोनों परखी जा रही हैं। और चूंकि इन पदार्थों के मनोरंजक इस्तेमाल का लंबा इतिहास है, इसलिए क्लिनिकल व्यवहार में मरीज़ की मंशा को उस तरह परखना होगा जैसे ज़्यादातर दवाओं में नहीं करना पड़ता।

भारतीय दवा कंपनियों के लिए मुद्दा नयापन नहीं, समय है। यह क्षेत्र मानसिक स्वास्थ्य दवाओं के मौजूदा बाज़ार से बड़ा हो सकता है, और घरेलू उद्योग की ताकत हमेशा किसी श्रेणी के स्थापित हो जाने के बाद विनिर्माण तथा फॉर्मूलेशन में रही है। इससे पहले उतरना है या नहीं, यानी परीक्षणों के बाद के बजाय परीक्षणों में, यही सवाल अभी मेज़ पर रखने लायक है।

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