BenchmarksClosed 23 Oct
  • NIFTY 5022,600.00↓ -0.39%
  • SENSEX73,123.83↓ -0.17%
  • NIFTY Bank54,287.35↓ -1.16%
  • USD/INR94.93↑ +0.65%

सब्सक्राइब

पेपर लीक रोधी विधेयक में सज़ा की सीमा बढ़ी, असली चुनौती अमल की है

केंद्र सोमवार को सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक लाएगा, जिसमें अधिकतम कैद दोगुनी और अधिकतम जुर्माना पांच गुना है। पर जो मामला अदालत तक पहुंचता ही नहीं, उसमें सज़ा बढ़ाने से कुछ नहीं बदलता।

लेखक Vikram Shettyप्रकाशित 5 मिनट का पाठ
Hand writing exam classroom. File photograph. फाइल फोटो।
Hand writing exam classroom. File photograph. फाइल फोटो। · फोटो: Alison wood / BY 3.0 via Openverse

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 सोमवार को संसद में आएगा। यह 2024 के उस कानून में संशोधन करता है जो सार्वजनिक परीक्षाओं में संगठित नकल रोकने के लिए बना था। ये संशोधन नीट के कथित लीक पर चल रहे प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में लाए जा रहे हैं।

सबसे बड़ा बदलाव सख्ती का है। अभी इस कानून के तहत दोषी व्यक्ति को तीन से पांच साल की कैद और दस लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। संशोधन में न्यूनतम सज़ा पांच साल की गई है, अदालतें दस साल तक की सज़ा दे सकेंगी और अधिकतम जुर्माना पचास लाख रुपये कर दिया गया है। विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में हाल के वर्षों की उन घटनाओं का हवाला है जिनसे परीक्षाओं की साख को नुकसान पहुंचा।

विधेयक सेवा प्रदाताओं पर भी शिकंजा कसता है, यानी वे निजी एजेंसियां जिन्हें परीक्षा संस्थाएं पेपर छापने, केंद्र चलाने और व्यवस्था संभालने का ठेका देती हैं। लीक की ज्यादातर जांचें यहीं आकर रुकती हैं, क्योंकि छापाखाने से परीक्षा हॉल तक की कड़ी कई ठेकेदारों से गुज़रती है और हर हस्तांतरण सामग्री के बाहर जाने का मौका है।

सज़ा के साथ विधेयक में समयबद्ध जांच और सुनवाई का प्रावधान भी है। यही प्रावधान शायद सज़ा की सीमा से ज़्यादा मायने रखता है। पेपर लीक के मुकदमे आमतौर पर नरम कानून से नहीं, देरी से बिगड़े हैं, और जिस मामले को अदालत तक पहुंचने में छह साल लगें उसमें दस साल की अधिकतम सज़ा का कोई डर नहीं रह जाता।

आने वाले हफ्ते का सवाल यह है कि विधेयक स्थायी समिति को जाता है या सत्र में ही पारित करा लिया जाता है। समिति में जाने से परीक्षा संस्थाओं, राज्य बोर्डों और ठेकेदारों को यह कहने का मौका मिलेगा कि व्यवहार में क्या लागू हो सकता है। व्यवहार बदलने वाले कानून और सिर्फ सज़ा की तालिका बदलने वाले कानून का फर्क यही है।

टैग

  • Parliament
  • Paper Leak
  • Legislation
  • Examinations
और खबरों के लिए स्क्रॉल करते रहें