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रिज़र्व बैंक का कहना है कि डॉलर अभियान से 32 अरब आए, और यह पुराना पैसा नहीं है

गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार बैंकों ने करीब 32 अरब डॉलर जुटाए, ज़्यादातर एफसीएनआर जमा से, और सरकारी प्रतिभूतियों में 7 अरब डॉलर से ज़्यादा आए।

लेखक Ananya Raoप्रकाशित 4 मिनट का पाठ
Tower and building of Reserve Bank of India, Mumbai 04. File photograph. फाइल फोटो।
Tower and building of Reserve Bank of India, Mumbai 04. File photograph. फाइल फोटो। · फोटो: Pinakpani / BY-SA 4.0 via Openverse

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि विदेशी पूंजी आकर्षित करने के भारतीय रिज़र्व बैंक के हालिया उपायों के तहत बैंकों ने करीब 32 अरब डॉलर जुटाए हैं, जिनमें ज़्यादातर विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा है। जून की नीतिगत घोषणाओं के बाद सरकारी प्रतिभूतियों में 7 अरब डॉलर से ज़्यादा विदेशी निवेश आया है।

द हिंदू बिज़नेसलाइन को दिए साक्षात्कार में मल्होत्रा ने इस सुझाव को खारिज किया कि यह प्रवाह महज़ पुरानी जमा को बेहतर रिटर्न वाले साधन में बदलना है। उन्होंने कहा कि इससे बनने वाली तरलता संभालने के लिए केंद्रीय बैंक के पास पर्याप्त उपाय हैं, और भू राजनीतिक अनिश्चितता तथा उतार चढ़ाव भरे वैश्विक पूंजी प्रवाह के दौर में इन आंकड़ों ने भारत की बाहरी स्थिति मज़बूत की है।

पुनर्चक्रण का सवाल पूछा जाना चाहिए, क्योंकि दोनों संभावनाएं सुर्खी के आंकड़े में एक जैसी दिखती हैं। व्यवस्था में आया नया पैसा बाहरी स्थिति सुधारता है। रुपये की जमा से डॉलर वाली जमा में गया पैसा आंकड़ा तो बढ़ाता है पर जोड़ता कुछ नहीं, और बदले में केंद्रीय बैंक पर हेजिंग की लागत छोड़ जाता है।

यही लागत गवर्नर से पूछा गया दूसरा मुद्दा थी, साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की विदेशी वाणिज्यिक उधारी के लिए दी जा रही रियायती विदेशी मुद्रा अदला बदली भी। दोनों सब्सिडी हैं और दोनों को स्थिरता की कीमत कहकर सही ठहराया जा सकता है, बशर्ते कोई उनका हिसाब रख रहा हो। गवर्नर ने अलग से रुपये को अवमूल्यित बताया, जो इस बारे में बयान है कि उनके हिसाब से उसका स्तर क्या होना चाहिए, न कि यह पूर्वानुमान कि वह कहां जाएगा।

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