भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने एक्सिस म्यूचुअल फंड के पूर्व मुख्य डीलर विरेश जोशी को सात साल के लिए प्रतिभूति बाज़ार से प्रतिबंधित कर दिया है। नियामक ने पाया कि उन्होंने फंड हाउस के आने वाले सौदों की गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल कर फ्रंट रनिंग की योजना चलाई। इसी अंतिम आदेश में बीस अन्य लोगों को तीन से सात साल तक के लिए प्रतिबंधित किया गया।

जोशी पर 3 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा और 21 लोगों पर कुल 7.4 करोड़ रुपये का। फरवरी 2023 के पहले के अंतरिम आदेश में स्पष्ट अवैध लाभ के रूप में 30.55 करोड़ रुपये संयुक्त और पृथक रूप से ज़ब्त करने का निर्देश दिया गया था।

फ्रंट रनिंग बताना आसान है और पकड़ना कठिन। कड़ी के भीतर बैठा कोई व्यक्ति, जिसे पता है कि बड़ा ऑर्डर आने वाला है, उससे पहले अपने लिए सौदा करता है और फिर उसी ऑर्डर से आए भाव के बदलाव से कमाता है। भाव ग्राहक के पैसे से बनता है, अंतर भीतर बैठा व्यक्ति ले जाता है।

यहां का तरीका बताता है कि ऐसे मामलों में वर्षों क्यों लगते हैं। नियामक ने पाया कि जोशी ने एक बड़े ग्राहक के आने वाले ऑर्डर की जानकारी बाहरी साथी प्रिजेश कुरानी को दी, जिसने पंद्रह अन्य लोगों के नाम के खातों से सौदे लगाए। तीन और लोगों ने वे खाते जुटाए तथा परिचय कराया। यह ढांचा बनाया ही इसलिए जाता है कि जानकारी रखने वाले और मुनाफा कमाने वाले खाते के बीच की कड़ी टूट जाए, और उसे दोबारा जोड़ने में ही समय लगता है। धोखाधड़ी 2022 में पकड़ी गई थी, अंतिम आदेश चार साल बाद आया है।